दिल्ली ब्लास्ट जांच में बड़ा खुलासा: नूंह में छिपकर रह रहा था संदिग्ध, दिन में कमरे से बाहर भी नहीं निकलता था
दिल्ली में हाल ही में हुए धमाके की जांच लगातार तेज़ होती जा रही है और इसी बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पुलिस की ताज़ा जांच में यह बात सामने आई है कि मुख्य संदिग्ध घटना से पहले हरियाणा के नूंह जिले में किराए के एक कमरे में कई दिनों तक छिपकर रहा। हैरान करने वाली बात यह है कि वह दिन में कभी भी कमरे से बाहर नहीं निकलता था और सिर्फ अंधेरा होने के बाद ही बाहर आता था।
जांच अधिकारियों का मानना है कि संदिग्ध पिछले कई हफ्तों से खुद को सामान्य लोगों की नज़र से बचाने की कोशिश कर रहा था। इसके लिए उसने न सिर्फ अपना ठिकाना बदला, बल्कि कई मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी किया ताकि उसकी लोकेशन या पहचान आसानी से ट्रेस न हो सके।
धमाका कैसे हुआ था?
दिल्ली के ऐतिहासिक इलाके के पास खड़ी एक कार में अचानक बड़ा धमाका हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हुए और काफ़ी नुकसान भी हुआ। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास की कई दुकानें और वाहन क्षतिग्रस्त हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत जांच के आदेश दिए।
पहली ही स्टेज में जांच टीमों ने पाया कि यह हादसा सामान्य नहीं था, बल्कि पूर्व-नियोजित और सोची-समझी घटना लग रही थी। इसके बाद संदिग्धों की तलाश शुरू हुई और CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और इलेक्ट्रॉनिक डाटा को खंगाला गया।
जांच में कैसे सामने आया नूंह का ठिकाना
पुलिस को कई CCTV फुटेज मिले जिनमें संदिग्ध एक कार और अलग-अलग फोन इस्तेमाल करते हुए दिखाई देता है। जांच में सामने आया कि घटना से कुछ दिन पहले वह फरीदाबाद के एक मोबाइल दुकान पर दो फोन तक लेकर गया था।
इसी इलेक्ट्रॉनिक ट्रेल को फॉलो करते हुए पुलिस नूंह तक पहुंची, जहां संदिग्ध ने किराए पर एक कमरा लिया था। मकान मालिक और पड़ोसी परिवार के अनुसार:
- संदिग्ध दिन में कभी बाहर नहीं आता था
- वह हमेशा दोपहर और शाम को कमरा बंद रखता
- रात होते ही शांतिपूर्वक बाहर निकलता और सड़क किनारे ढाबों पर खाना खाता
- उसी कपड़ों में कई दिनों तक रहता
- किसी से बातचीत नहीं करता था
परिवार का कहना है कि उसका व्यवहार बेहद संदिग्ध और दबाव में रहने जैसा था।
कई मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहा था
जांच में ये भी सामने आया कि संदिग्ध ने अपने पास कई सिम कार्ड और कई मोबाइल फोन रखे हुए थे।
CCTV वीडियो में वह अलग-अलग फोन इस्तेमाल करते हुए दिखाई देता है। यह संकेत देता है कि वह लगातार अपनी लोकेशन को छुपाने की कोशिश में था।
फोरेंसिक टीमों ने घटना स्थल से मिले डिजिटल प्रमाणों का भी विश्लेषण शुरू कर दिया है। शुरुआती रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि धमाके में इस्तेमाल कार के अंदर कोई फोन नहीं मिला, जिससे शक है कि संदिग्ध ने फोन कहीं फेंक दिया होगा।
धमाके के बाद अचानक गायब हो गया संदिग्ध
मकान मालिक के परिवार ने जांचकर्ताओं को बताया कि संदिग्ध 9 नवंबर की रात अचानक गायब हो गया।
उस रात वह देर तक बाहर नहीं निकला, और अगले दिन जब परिवार ने उसके कमरे का दरवाज़ा देखा तो वह खाली था।
परिवार ने बताया कि:
- कमरे से हल्की बदबू आ रही थी
- सामान जगह-जगह बिखरा हुआ था
- उस दिन वह बेहद घबराया हुआ लग रहा था
परिवार ने यह भी बताया कि उसी दिन न्यूज़ में धमाके की खबर चल रही थी जिसके तुरंत बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ की।
फरीदाबाद और नूंह कनेक्शन की पुष्टि
जांच टीम को यह भी पता चला कि संदिग्ध कुछ दिन पहले फरीदाबाद से नूंह पहुंचा था।
वहां पर उसने स्कूल/कॉलेज से जुड़े एक परिचित की मदद से किराए का कमरा लिया था।
जांच में यह भी जानकारी मिली कि संदिग्ध अल-फला यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद और नूंह के बीच कई बार आया-जाया करता था। हालांकि पुलिस ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है कि उसका किसी विशेष संगठन से सीधा संबंध है या नहीं।
विस्फोटक सामग्री और बरामदगी
ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में एक अन्य संदिग्ध के किराए के घर से करीब 360 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ बरामद किया है। माना जा रहा है कि दोनों संदिग्ध किसी बड़े मॉड्यूल का हिस्सा हो सकते हैं।
धमाके और बरामदगी के ये दोनों केस अब एक साथ जोड़कर जांचे जा रहे हैं ताकि पूरी साजिश की परतें खोली जा सकें।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने इस मामले में कई टीमें गठित कर दी हैं।
आगे की कार्रवाई में शामिल हैं:
- नूंह के किराए के घर की फोरेंसिक जांच
- इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के डेटा की रिकवरी
- फोन कॉल डिटेल्स
- संदिग्ध की मूवमेंट ट्रैकिंग
- संभावित मददगारों की पहचान