नौगाम पुलिस स्टेशन में बड़ा हादसा: विस्फोटकों का परीक्षण करते समय अचानक हुआ धमाका
श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर — शुक्रवार देर रात जम्मू-कश्मीर के नौगाम पुलिस स्टेशन में एक भारी धमाका हो गया, जिसमें कम से कम 8 पुलिस और तकनीकी कर्मी घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब टीमें फरीदाबाद से जब्त किए गए विस्फोटकों का सैंपल निकालने और उनका परीक्षण करने में जुटी हुई थीं।
यह वही विस्फोटक सामग्री है जो हाल ही में हरियाणा के फरीदाबाद में एक किराए के घर से 360 किलो से अधिक मात्रा में बरामद की गई थी। जांच एजेंसियों ने इसे एक व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल का हिस्सा बताया था, जो बड़े पैमाने पर विस्फोटक तैयार करने में शामिल था।
धमाका कैसे हुआ?
प्राथमिक जांच के अनुसार, पुलिस स्टेशन के अंदर विशेष रूप से बनाए गए सुरक्षित कमरे में chemical sampling की जा रही थी। इसी प्रक्रिया के दौरान एक तेज रासायनिक प्रतिक्रिया हुई और अचानक जोरदार धमाका हो गया।
धमाके के बाद:
- कुछ ही सेकंड में कई छोटे-छोटे ब्लास्ट सुनाई दिए
- धुआं पूरे कमरे में फैल गया
- बम निरोधक दस्ते को rescue शुरू करने में थोड़ी देरी हुई
- घायलों को तुरंत एम्बुलेंस से अस्पताल पहुँचाया गया
CCTV फुटेज भी सामने आया है, लेकिन समाचार एजेंसी अभी इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर पाई है।
फरीदाबाद से कैसे पहुँचा विस्फोटक जम्मू-कश्मीर?
इस पूरी घटना की जड़ें फरीदाबाद के एक घर से शुरू होती हैं, जहां से पुलिस ने कुछ सप्ताह पहले:
- 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट
- 2900 किलो IED बनाने वाला सामान
- केमिकल्स
- डेटोनेटर
- वायर
- और अन्य बम बनाने वाले उपकरण
बरामद किए थे।
यह बरामदगी एक बड़े टेरर मॉड्यूल के खुलासे के दौरान हुई थी, जिसका संबंध कश्मीर घाटी में उभरती हुई कट्टरपंथी गतिविधियों से बताया जा रहा है।
गिरफ्तारी और मॉड्यूल का खुलासा
यह पूरा केस तब शुरू हुआ जब अक्टूबर में श्रीनगर के कई इलाकों, खासकर बुंफोरा और नौगाम, की दीवारों पर सुरक्षा बलों को धमकी देती पोस्टर लगाए गए थे।
सिटी पुलिस ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) बनाई।
जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए:
- आरिफ निसार डार उर्फ साहिल
- यासिर-उल-अशरफ
- मकसूद अहमद डार
इनकी पूछताछ में नाम सामने आया:
मौलवी इरफ़ान अहमद, जो शोपियां का पूर्व पैरामेडिक और बाद में इमाम बन गया था।
उस पर आरोप है कि वह इस पूरे मॉड्यूल को वैचारिक रूप से तैयार कर रहा था और नए लोगों को जोड़ रहा था।
इसके बाद जांच की दिशा फरीदाबाद की ओर मुड़ी और फिर पुलिस अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहुँची, जहां से डॉक्टर मुज़म्मिल अहमद गनई और शाहीर सईद को गिरफ़्तार किया गया।
घायलों की स्थिति कैसी है?
अस्पताल सूत्रों के अनुसार:
- दो पुलिसकर्मी को मध्यम श्रेणी के जलन की चोटें
- तीन को कान के परदे पर blast-pressure का असर
- बाकी को हल्की चोटें आई हैं
डॉक्टरों ने बताया कि सभी की हालत स्थिर (Stable) है और खतरे से बाहर हैं।
तेज़ी से की गई evacuation ने बड़ी जनहानि होने से रोक दिया।
आगे की जांच किस दिशा में जाएगी?
जांच एजेंसियां फिलहाल दो पहलुओं पर फोकस कर रही हैं:
- क्या पूरा 360 किलो विस्फोटक पुलिस स्टेशन में ही रखा गया था?
- क्या दुर्घटना chemical instability की वजह से हुई या किसी human handling error से?